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Lucknow University में पढ़ाया जा रहा है ‘गर्भ संस्कार’ का डिप्लोमा कोर्स,जानिए इस पाठ्यक्रम के शानदार फायदे

रिपोर्ट:- अंजलि सिंह राजपूत,लखनऊ

तेजी से बदलते माहौल में गर्भावस्था के दौरान महिलाएं कैसे अपना और अपने होने वाले बच्चे की सेहत का ध्यान रखें इसको लेकर अक्सर महिलाएं और उनका परिवार तय नहीं कर पाता है.ऐसे में हर छोटी बड़ी जानकारी के लिए उन्हें डॉक्टर के चक्कर काटने पड़ते हैं.महिलाओं को इस समस्या से बाहर निकालने के लिए लखनऊ यूनिवर्सिटी ने इंस्टीट्यूट ऑफ वूमेन स्टडी से पीजी डिप्लोमा और गर्भ संस्कार के नाम से एक कोर्स चल रहा है.जिसमें किसी भी उम्र के पुरुष और महिलाएं दाखिला ले सकते हैं.इसके अलावा छात्र-छात्राएं भी इसमें दाखिला ले सकते हैं.इस कोर्स की जरूरत पर इस विभाग की कोऑर्डिनेटर प्रोफेसर डॉ. अर्चना शुक्ला बताती हैं कि बदलते माहौल में आजकल ज्यादातर एकल परिवार है.महिलाएं ऐसे में गर्भावस्था के दौरान नहीं समझ पाती हैं कि उन्हें क्या खाना है,क्या पीना है, क्या पहनना है कैसे उठना और कैसे बैठना है और कैसे अपने आने वाले बच्चे का ध्यान रखना है.ऐसे में कई बार महिलाएं जानकारी न होने के कारण गलतियां कर जाती हैं.जिसका असर उनके बच्चे पर पड़ता है और बच्चे का शारीरिक और मानसिक विकास नहीं हो पाता है.महिलाओं की इन दिक्कतों को दूर करने के लिए इसकी जरूरत को पूरा करने के लिए इस कोर्स को शुरू किया गया है.यह कोर्स 2020 में शुरू किया गया था लेकिन इसे पहचान अब मिली है.यही वजह है कि 50 साल के ऊपर के पुरुष और महिलाएं भी इसमें दाखिला ले रही हैं.

55 साल के योग विशेषज्ञ भी कर रहे हैं कोर्स
इस कोर्स को एक 55 साल के योग विशेषज्ञ भी कर रहे हैं.उन्होंने बताया कि वह खुद का योग सेंटर चलाते हैं.जिसमें आने वाली गर्भवती महिलाओं को वह ये उपयोगी जानकारी देना चाहते हैं.

इस कोर्स को करने के बाद मेटरनिटी सेंटर में आसानी से काउंसलर बना जा सकता है.इस कोर्स के अंतर्गत एक महीने की ट्रेनिंग कराई जाती है.कोर्स में दाखिला लेने वाले ज्यादातर पुरुष और महिलाओं का एक उद्देशहोता है कि वह इस कोर्स के बाद मेटरनिटी सेंटर में नौकरी कर आत्मनिर्भर बन सकती हैं.उन्होंने बताया कि इस कोर्स को केजीएमयू,आयुर्वेदिक डॉक्टर और म्यूजिक विशेषज्ञ समेत करीब 28 एक्सपर्ट्स पढ़ाते हैं.

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