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पढ़ाई के लिए जाते थे दूसरे शहर, आज अपने शहर में ही दे रहे हजारों को नौकरी, 10,000 से बनाई 600 करोड़ की कंपनी

हाइलाइट्स

वैल्यू पॉइंट की स्थापना 1991 में हुई थी.
यह कंपनी आईटी कंपनियों को सेवाएं देती है.
कंपनी का अधिकांश श्रमबल ग्रामीण क्षेत्रों से आता है.

नई दिल्ली. वैल्यू पॉइंट के संस्थापक RS शानभाग ने 10,000 रुपये से कंपनी की नींव रखी थी. उन्होंने 3 मंदी का सामना किया और लड़ते-जूझते इसे 600 करोड़ की वैल्यू वाली कंपनी बना दिया. आज दुनिया की 500 सबसे बड़ी कंपनियां यानी फार्च्यून 500 में से 73 कंपनियां वैल्यूपॉइंट की क्लाइंट्स हैं. शानभाग कर्नाटक के एक छोटे से शहर होते हैं लेकिन उन्हें इसे कभी अपनी कमजोरी नहीं बनने दिया.

शानभाग कर्नाटक के छोटे से शहर अम्बिकानगर से आते हैं. यहां कोई अच्छा स्कूल या शिक्षण संस्थान नहीं था. इसलिए शानभाग को स्कूली शिक्षा लेने के लिए भी हर दिन दूसरे शहर जाना पड़ता था. उनका मन हमेशा ग्रामीण लोगों के आसपास रहने का करता था. पढ़ाई पूरी करने के बाद उन्होंने कुछ समय के लिए पंजाब सरकार के साथ काम किया लेकिन गांव के लोगों के लिए कुछ करने की उनकी ललक खत्म नहीं हुई. इसके बाद 1991 में उन्होंने वैल्यू पॉइंट की स्थापना की. ध्यान दें कि यह वो समय था जब भारतीय बड़े आर्थिक बदलाव से गुजर रहा था.

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नई लहर से जुड़े
1996 में जब डेल, एचपी और माइक्रोसॉफ्ट जैसी कंपनियां अपने को भारत में स्थापित कर रही थीं तो वैल्यू पॉइंट भी उस लहर से जुड़ गई. कंपनी ने इन सभी टेक कंपनियों के साथ काम करना शुरू कर दिया. इसके बाद 2008 में वैल्यू पॉइंट गांव की तरफ चली गई और वहां महिलाओं के सशक्तिकरण पर काम करने लगी. इससे कंपनी के उस विजन को सफल करने की कदम बढ़ाने का मौका मिला जिसमें वह स्थानी समुदायों को सशक्त करना चाह रहे थे. 2020 में कंपनी का अनुमानित रेवेन्यू 600 करोड़ रुपये तक पहुंच गया.

वैल्यूपॉइंट और ग्रामीण महिलाएं
आपको यह हैरानी और सुख दोनों की अनुभूति होगी कि वैल्यू पॉइंट का 90 फीसदी स्टाफ ग्रामीण इलाकों से आता है. वहीं, इसमें से 85 फीसदी कर्मचारी महिलाए हैं. वैल्यूपॉइंट पहले छोटे शहरों या गांवों के पास ऑफिस बनाता है फिर वह उन इलाकों से लोगों को भर्ती कर टेक्नोलॉजी और सर्विस की ट्रेनिंग देता है. इसके बाद इन लोगों को निर्धारित टास्क दे दिए जाते हैं जो उन्हें पूरे करने होते हैं.

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